EK ANSUNISI KAHANI

आज प्रबिन को 26  साल पुरे हुए। फिर बी उसके चहरे पे बही सवाल जिसका जवाब वो पिछले 5 साल  से ढूंढ रहा हे। पर उसे आज  तक  उस सवाल का जवाब नहीं मिला। पेरेसान  होगया हे प्रबीन।  घर में कोई उसके इस सवाल का जवाब नहीं देता के आखिर उसके हर जनम दिन में उससे एक सपना क्यों आता हे के एक बुरी प्रेत आत्मा उसके सारे परिवार को मार् देती हे।  सीबाये उसके। .जब भी वो ये सवाल अपने घर के  किसी सदश्य से पूछता, सब इससे बस एक बुरी सपना कह क टाल देते। आज 26  साल का होगया हे प्रवीण। और उस आत्मा के  मुता बिक एहि वो साल हे।

प्रवीण तुम्हे ये गाड़ी केसी लगी बेटा। अछि हे DAD , थैंक्स
ाचा सुनो बेटा दादी की तबियत थोड़ी ठीक नहीं हे ात्ते टाइम दादी की मेडिसिन लेना यद् से। जी माँ
सामं होते होते होते दादी की तबियत और भी बिगड़ने लगी। डॉक्टर आये पैर टेस्ट एक डैम नौर्मल।

प्रवीण  : डॉक्टर साहब ऐसे कैसे
डॉ : बेटा में भी हैरान हूँ ५ साल से तुम्हारे दादी का इलाज कर रहा हूँ पैर ऐसी बात कवी नहीं देखि मेने
प्रवीण : क्या दादी को अब सही नहीं किआ जा सकता
डॉ : कुछ केह नहीं सकते

रात के ३ बजे
दादी चिल्ला ने लगी. वो मारदेगी मुझे।  मुझे बचालो
प्रवीण :कौन मरदेगा तुम्हे दादी
दादी : वो आगयी हे। उसने कहता वो आएगी। में मरना नहीं चाहती
प्रवीण :नहीं दादी कुछ नहीं होगा हम सब हेना।

अगले दिन सुबह जब प्रवीण दादी के कमरे में गया तो उसके होस उड़ गए

प्रवीण : माँ माँ. . .... ..... माँ। ...
माँ : क्या हुआ बेटा। .

दोनों उस समाये दादी को देख के अपने आँखों पे यकीं नहीं कर परहेथे
दादी एक सीसे का टुकड़ा लये अपने ही हटो को काट रही थी

प्रवीण : दादी ये आप क्या कर रही हो
दादी ने कहा : आज मेरा आखरी दिन हे में तो जा रही हूँ पर तू बाक़िओं को कैसे बचाएगा। .वो आ  चुकी हे

उसदिन दादी ने अपनी  आखरी सांसे लेते वक़्त भी... वो डर साफ साफ उनके आँखों से छलक  रहा था
दादी के जेने को अब दो दिन बीत चुके थे अचानक प्रवीण की माँ की तबियत कुछ बिगड़ ने लगी
अजीब से दोरे भी आने लगे प्रेवेन की माँ को

वो आगयी वो मुझे भी मरदेगी।  वो आगयी
अब प्रवीण का सब्र का बंद टूटने लगता कुछ तो था जो उससे जुड़ा हुआ था। ऊपर से उड़के दादी गुजर गयी माँ की हालत खराप क्या होरहा हे उसके साथ। उसने इस बारेमे अपने डैड से बात की

प्रवीण : डैड ये सब क्या होरहा हे आपलोग मुझसे क्या छुपा रहे हो। दादी गुजर गयी ,माँ की हालत नाजुक
डैड :बेटे अब सही समये नहीं आया। पहले हमे तुम्हारे माँ की इलाज क लिए सोचना चाहिए..
माँ की हालत को देख क प्रवीण मन गया.
अगले दिन सुबह जो हुआ सायद ये एक अम्म इंसान को पागल बना देने क लिए काफी था
प्रवीण ररत को अपने माँ क पास ही सोगया था। .सुबह को जब आंख खुली तो माँ बिस्तर पे नहीं थी वल्कि चाट पे उलटी लटकी हुई थी। .प्रवीण को लगा वो अभी भी सपने में हे। उसने जब नज़दीक जेक देखा तो उसके आंखोसे आंसू बह गए। उसकी माँ खुद अपने हटो को काट के खा रही थी। और अपना ही खून पी रही थी. अपनी माँ को इस हालत में सायद ही कोई बीटा देख पाए. प्रवीण ने अपने डैड को बुलाया पैर सभा होते होते बोहत देर हो चुकी थी अब उसकी माँ को भी समझ में आज्ञा था की वो अब जाने वाली हे। उन्होने प्रवीण को एक बार गले लगाया और कहा की परसो तक हम सब साथ में होंगे।  और वो चल बसी।

दो दिनों में परिबार क दो सदयों की मौत ने प्रबीन को मनो जैसे हिला क रख दिया हो.
अपने उदास दिल को लेके वो सैम को घर लौटा ही था की उसके डैड क कमरे से कुछ अजीब सी आवाजे सुनने में आया। वो तुरंत डैड क रूम में भगा।

दरवाजा खुल ते ही उसके आंखे फटी रह गयी। उसके डैड को उसी तारिक से दौरे  आने सुरु होगये थे।
डैड उठिये यहाँ से प्ल्ज़ उठिये
डैड: वो आगयी हे अब मुझे जाना होगा। वो सब को मर डालेगी उसीने तेरी माँ को मारा हे उसीने तेरी दादी को मारा हे उसीने सब किया हे।
प्रवीण :कौन डैड कौन। कौन हे वो। अब प्रेवेन को समझ आज्ञा था की वो जो भी हे वो किसीको नहीं छोड़ रही हे
उसने किसी तांत्रिक को बुलाने की बात सोची पैर वो अपने डैड को अकेले छोड़ क भी नहीं जासकता घर क किसी भी मोबाइल में कॉल नहीं लगरहा।
अचानक से उसके डैड को दौरे  आना बंद होगये। तवी प्रवीण ने पूछा डैड प्ल्ज़ मुझे सब सच बताइये क्या हो रहा हे तो उसके डैड  की घर क बेस मेन्ट में एक कमरा हे जहा पे एक बुरी आत्मा का साया हे वो कबसे हम सबसे बदला लेना चाहती हे और आज वो आजाद होगयी हे। उससे अब कोई नहीं रोक सकता। प्रवीण ने पूछा कोई तो रास्ता होगा।
डैड : नहीं अब बोहत देर हो चुकी हे। ये कह के वो चुप होगये। और प्रवीण से कहा बेटे कल सायद वो तुझे भी लेने आएगी। इतना कहते ही बेसमेंट में भट तेज़ी से कुछ टूट नेकी आवाज आयी। प्रवीण निचे भगा भगा गया पैर वहां तो कुछ नहीं था। .फिर जब वो वापस आया तो उसके डैड ने दरवाजा अंदर से लुक कर लिया था। .प्रवीण रात भर बाहर रोटा रहा और सुभे उठके उसके आँखों क सामने अँधेरा छागया। उसके डैड अब नहीं रहे। वो बेसमेंट के उसी रूम के आगे मरे पड़ेथे जिसकी बात वो कल रत को प्रवीण को बताया था।

सिर्फ 4 दिनों में एक परिवार ख़तम होगया था और आज सायद प्रवीण की बारी थी।

दिन ढल गया सैम होते होते प्रवीण ने भी खुद को एक रूम में लक कर लिया और उस आत्मा का इंतजार करने लगा। अब वो इस दुनिया में जी क क्या करे जहाँ उसके डैड माँ  दादी नहीं रही उसका परिवार नहीं रहा। रात क करीब १० बजे उसके मोबाइल में एक कॉल अत हे अचानक से। .वो देख ता हे उठा के तो उसकी आंखे फटी की फटी रह जाती हे। मोबाइल में उसके डैड का कॉल था।  उसने दर ते हुए फ़ोन उठाया तो उधर से आवाज आयी :-

क्यों बेटे कोई इतनी देर लगता हे फ़ोन उठाने में।  निचे आओ हम सब तुम्हे लेने ाएँ हे। ये सुन क प्रवीण फ़ोन काट देता हे।  फिर उसकी माँ का फ़ोन अत हे वो भी वही बाटे दोहराती हे। अब प्रवीण को यकीं होने लगताहै की वो अब सायद नहीं बचे।  फिर भी वो हिमत करके निचे हाल में जाता हे वहां उसे उसकी दादी , माँ ,डैड बैठे हुए नजर ातें हे। वो अपनी आँखों पे यकीं नहीं कर पता। जो उसके साथ हुआ क्या वो सब एक सपना था।  पैर ये क्या दादी की परछाई क्यों नहीं दिख रही। इसका मतलब ये सब मर चुकें हे. और मरचुकें हे तो फिर यहाँ कैसे आये।  तभी उसके डैड बोलतें हे ाजाओ बेटा  हमारे साथ ाजाओ बरना तुम्हे वो  बुरी आत्मा मार डालेगी। देखो माँ भी हे। हमारे साथ ाजाओ। प्रवीण कहता हे अप्प सब तो मर चुकें हे न तो में अप्प सब क साथ कैसे जाऊं। तभी उसकी दादी एक चाकू हात मेलेके बोलती हे में इस चाकू को तुम्हरे साइन में दाल दूंगी फिर तुम हमारे साथ आसाकते हो।
ये क्या होरहा था प्रवीण क साथ एक तरफ वो बुरी आत्मा इ तरफ उसके अपने ही घर बाले। .हर कोई उसे मरना चाहता था क्या ये सब सच था या एक सपना। ..... वो खुदको अपने कमरे में बंद करलेता हे पैर उसके दादी डैड और माँ वहां पहंच जाते हे और जोर जोर से दरवाजा पीटने  लगते हे। प्रवीण को कुछ समझ में नहीं आता क वो क्या करे। finally उसके रूम का दरवाजा भी टूट जाता हे और उसके दादी उस चाकू को लेके उसकी और बढ़ ती हे। वो उस चाकू को उसके साइन में दाग नहीं वाली होती हे की वो बुरी आत्मा उसी कमरे में अजा ती हे  जिसने उन तीनो को मराथा। और वही आत्मा प्रवीण क परिवार वालों के आत्माओ को भी नस्ट कर देती हे। .ये बात प्रेवेन को समझ में नहीं अति। उसके साथ जो हो रहता क्या वो एक आम इंसान क साथ होसकता हे।
उसने उस आत्मा से पुछा : तुम कौन हो तुमने मेरे परिवार को मार डाला और आज जब उन्होंने मुझे मारना चाहा तो तुमने मुझे बचाया ये सब क्या होरहा रे। तुम वही जो मेरे सपनो में अति थी। हेना कौन हो तुम........

वो आत्मा बिना कुछ बोले निचे चली जाती हे उसी बेस मेन्ट में प्रवीण भी उसके पीछे उसी बेसमेंट में चला जाता हे। जहा वो जेक जो कुछ भी देख ता हे उसे यकीं होजाता हे की ये सपना नहीं हे। उस रूम में भट साडी फोटो हे प्रवीण की बचपन की। .पैर ये क्या वो जिस औरत क हात में हे ये तो उसकी माँ नहीं हे। और उसके डैड की इस औरत क साथ सदी की फोटो कैसे।।।।।।।।।।।।।।।।

तभी एक छोटी सी लड़की वहां अति हे और प्रवीण का हाट पकड़ के कहती हे :- भया आप आगये। .
प्रवीण कुछ बोल नहीं पाता। आखिर एक छोटी सी लड़की जिसको वो जनता तक नहीं वो उससे भाई क्यों बुलाएगी।  तभी वो लड़की उसकी सारि राज़ से पर्दा उठती हे

लड़की:- हमारे डैड ने जिससे पहले सदी किती उनका कोई बचा नहीं हुआ उनसे। ये बात दादी को खटकती रही फिर दादी ने मेरी माँ से डैड की सदी करवादी. मेरी माँ गरीब घर की थी उनसे ये बात छुपाई गयी की डैड पहले से सदी सुदा हे। डैड मेरे माँ से प्यार का झूठा नाटक करते रहे। जब तुम पैदा हुए तो उनलोगोंने मेरी माँ से तुम्हे छीनलिया। और उन्हें इस बेस मेन्ट में बंद करदिया।  फिर एक साल बाद में पैदा होगयी। पैर में लड़की थी न तो मुझे प्यार करने वाला कोई नहीं था इस घर में। दादी ने माँ को एक बार भी तुमसे मिलने नहीं दिया।  पैर डैड क कहने पे मुझे ४ साल के होने के बाद वहाँसे ये कह क लाया गया के मेरी पढाई डैड करवाएंगे। में तुम्हे राखी बांधना चाहती थी हमेसा पैर डर क वजेसे नहीं बांध पायी कभी। फिर एक दिन दादी ने और बड़ी माँ ने मिलके मुझे भी मरवादिया और मेरी माँ को भी मरने छोड़दिया निचे। जिससे तुम हमेसा से एक बुरी आत्मा समझते आए हो वो तुम्हारी माँ हे। .और में तुम्हारी छोटी बेहेन.

उसदिन क बाद प्रवीण को किसीने नहीं देखा

क्या प्रवीण के जगह अप्प होते तो इस बात को मान पाते। .......

ये थी मेरी कहानी एक सफर सभी में।

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