दो लब्ज़ों की हे दिल की काहानी -भाग 2

emotional love story in hindi - प्यार भरी दो लब्ज़ों की हे दिल की काहानी -भाग 2

दो लब्ज़ों की हे दिल की काहानी -भाग 2
मुंबई सेहर अपने साथ नजाने कितने सपनो को समेटे हुए चल रहा हे, ये सायद ही कोई बयां कर पाए। मेरे मुंबई पहंचने के बाद लता दीदी(हमारे बड़े ताऊजी की बेटी ) मुझे लेने आयी। मज़बूरी भरे लहजे में उन्होंने मुझे गले लगाया। उनके लहजे से ये साफ था के मुझे उनके पास रखना एक मज़बूरी का सिला हे बस। गाऊँ में पिताजी के उनपे कई एहसान थे। ताऊजी के गुजर जाने के बाद दीदी पिताजी से बहत  ही ज्यादा दुरी बनालि। खेर मेरे लिए ये मायने  रखता था की में कैसे अपने सपनो को पूरा कर सकूँ। कुछ ही महीनो में मुझे मुंबई को जानने का मौका मिला। रफतार को चुनौती पेस करते हुए इंसान ऐसे जैसे आपको नजर अंदाज करते हुए। आखरीकार  मुझे भी एक नौकरी मिलगई। सपने देखना मुझे भी तो पसंद थी। छोटेसे सेहर से आने के वाबजूद मेरे सपनो ने अपनी उड़ान नहीं छोड़ी। एक प्राइवेट कंपनी में फ़ूड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट में नोकरी लग गयी। चीज़ों को बारीकी से टेस्ट करना मेरा काम था। सुभे १० से लेके रात के  8 बजने तक ऑफिस में रहना पड़ता। लौटने पे दीदी के वो सक भरी निगाहों से किये गए सवाल, ऐसा लगता था कीमत सपनो से बड़ी होगयी हो। माँ की याद को दिल में रख के आंख बंद करके रहलेति थी। फिर लगा  के दीदी के घर से रुक्सत होने का बक्त आगया हे। सायद वो  भी रुक्सत होने के वजह से बड़े अछेसे वाकिफ थे ,इसीलिए जाते वक़्त  ज्यादा सवाल जवाब नहीं हुआ। अब मेरी सफर मेरे कदमो के साहारे सुरु होचुकी थी। सायद एहि वो पल था जिसने मुझमे डर पैदा किया। पीछे लौट जाने को बोलती हुई आवाज़े रूह तक को गमज्यादा कर जाती थी। किसी दोस्त के पास मेरे लिए वक़्त नहीं था। या यूँ कहूं तो में अब किसी के वक़्त के काबिल न रही थी। जिंदगी मुझे अपनी असलियत दिखाने में लागीथि। एक रोज की बात हे सुबह सुबह जल्दी जल्दी में ऑफिस के  लिए निकल ही रहीथी के आंखोमे एक कचरा नजाने कहांसे आ गिरा। दो पल के लिए आंखे बंद हुई तो पानी के तलाश में बैग में हात  डाला तो पता चला के पानी लाना तो में भूल गयी थी। दर्द के बढ़ने के साथ ही एक हलकी सी गरम सांसे मेरे आँखों के क़रीबसे बह गए। हालाकि दर्द अभी भी काम नहीं हुए थे पर दिमाग उसी बंद आंखोसे उस इंसान को ढूंढ रहीथी जिसने इस भागते हुए सेहर में दो लम्हा रुकने की हिमाकत कर डाली थी, वो भी मेरे लिए। क्या  यहाँ कोई किसी की मदत  कर सकता हे।emotional love story in hindi

"क्या आप ठीक हैं ?" ये लफ्ज़  पहली दफा सुनी मुंबई आने के बाद।  कौन हे ये। कास में देखलेति अभी। बार बार मेरे दर्द कम करने के कोसिस में वो इंसान मेरे दिल में उतरता जरहाथा। "रुकिए में पानी लेके आता हूँ "ये कह के वो सख्स पानी लेने गया ही था की मेरे एक दोस्त वहां आगयी। आँखों में पानी मरते ही ऐसा लगा की कोई सपना जैसे टुटा हो। वो सख्स गायब था। फिर भी आंखे एक बार उस सख्स को देखना चाहती थी जिसने बिना कोई जान पहचान  मेरी मदत की। पर वो नहीं लौटा। दिन भर ऑफिस में उसके वारेमे सोचती रही। उसके प्यार से बोले दो लफ्ज़ दिल को छूके रूह में उतर गयी थी।emotional love story in hindi

"ओए  बानी" (मेरा घरेलु नाम ) इस आवाज़ से ध्यान टुटा

हाँ
घर नहीं जाना ? रात के 9 बजने वाले हैं। किसके यादों में खोये हो।
नेही तो। ...... .....ऐसी बात नहीं हे तिथि (मेरी दोस्त ) . बस ऐसे ही emotional love story in hindi
तिथि :- ऐसे ही नहीं हे बानी जी। ..... कुछ तो हे आपके जेहन में ,जो हमसे छुपाने की नाकाम कोशिश की जा रही  हे।emotional love story in hindi
उफ्फ आपकी ये दोस्ती भरी निगाहों से कैसे बचूं। ...तिथि जी, (मेरे चहरे की मुस्कराहट कुछ तो बयां कर रहीथी उसदिन )

"आप जिंदगी में अपने दोस्तों से कुछ भी छुपा नहीं सकते। मेरे आँखों में उस इंसान की तलाश को सायद तिथि ने भाँप लिया था। अपने आंखोसे हजारो सवाल  लिए मुस्कुराना कोई तिथि से  सीखे। "
एक पराया सा लगने वाला सेहर आज नजाने क्क्यो अपनों जैसा लगने लगा था। emotional love story in hindi

आखिर ऐसा क्यों??????

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