hindi stories - जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - भाग 1

hindi stories के  इस भाग में जानेगे एक ऐसी घटना के बारेमे जिससे पूरा का पूरा गाऊँ तबाह होगया। 


hindi stories - जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - भाग 1

बो केहेते हे न इंसानी ताकत एक जगह पे जाके ख़त्म होजाती हे। उम्र का तकाजा तो यही कहता हे की हमे हर फैसले से पहले हमारे बड़ों से बात करलेनी चाहिए। क्यों के उन्होंने हमसे ज्यादा जिंदगी देखि हुई हे। गाऊँ के सरपंच जी के के मौत के बाद गाऊँ के युबा अधक्ष्य गाओं के बिकास को लेके गाऊँ के मुखिआ जी के पास पहंचे। मुखिआ जी का गाऊँ बड़ा रुतबा था। लेकिन उम्र होजाने के वजेसे वो अब गाऊँ के काम काज में इतना दखल नहीं देते। दिन भर अपने हवेली में ही  रहते हैं। सरपंच जी के मौत के बाद दुबारा चुनाब होने में थोड़ी देरी थी। इसलिए इस मोके का फ़ायदा उठाते हुए गाऊँ का युबा नेता कालीचरण ने गाऊँ के बाग दौर संभालना  चाहा ता था। पर गाओं के लोग अभी बी मुख्या जी के बिना कोई बी काम नहीं करते थे। जरासल गाओं के बाहरी इलाकों में एक जंगल था जहाँ पे गाऊँ वालों को जाने की सख्त मनाई थी। ऐसा कहा जाता था के वहां पे किसी सेतनी  ताकत का बास हे। और इसी बात के चलते कालीचरण उर्फ़ कालिआ वो जंगल को लीज़ पे लेना चाहता था। उस जंगल की आधी जमीं सर्कार की और आधी जमीं मुख्या जी का था। इसीलिए कालिआ  मुखिआ जी से जमीन  लीज़ पे लेने की बात करने गया था। पर जैसे ही मुखिआ जी को उसने जमीन लीज़ पे लेने की बात बताई तो मुखिआ जी ने साफ साफ इनकार करदिया। पर अब वक़्त धीरे धीरे बदलने लगाथा। युबओं का दौर था ,और युबाओ का दौर होने के खातिर कालिआ को गाऊँ के युवाओं का काफी अच्छा खासा समर्थन हासिल था। और इस समर्थन के चलते मुखिआ जी को कालिया की बात को न चाहते हुए भी मान ना  पड़ा। पर जाते जाते कालिया को  मुखिआ जी ने काहा के जंगल में उनके पुरखो के समाधी हे वो उन्हें हात न लगाए। hindi stories

कालिया अपने अदमीओं के साथ मिलके जमीन खुदाई करने लगा। उससे किसी बिस्वस्त सूरतों से खबर मिलीथी के इसी जंगल में कहीं पे भगबान माहा काल का त्रिसूल जो की सोने का हे और जिसकी इंटरनेशनल बाजार में कीमत अरबो रुपए हे। इसी चकर में कालिया खुदाई करता राहा। करीब एक महीना खुदाई करने के बाद एक दिन उसकी नजर एक कब्र पर पड़ी। जहाँ पे कुछ लोहे की बेड़िया थी। उन बेड़िओं को हटाने का फैसला लिया कालिया ने। हो न हो ये त्रिसूल यहीं पे हे। और सच मूछ त्रिसूल वहीँ पे था। पर ये क्या वो सारे लोग मिलके भी त्रिसूल को उठाना तो दूर उसे हिला भी नहीं पा रहे थे। क्यों के कालिया एक लालची और बुरा इंसान था इसीलिए उससे वो त्रिसूल हिलाया भी नहीं जा रहा था। तभी उसने एक तरकीब सोचि, उसने अगले ही दिन अपने 8 साल के बेटे को वहां लेके गया और उससे त्रिसूल को हटाने को काहा। बचे तो भगवान के ही रूप होतें हे। जैसे ही ही उस बचे ने त्रिसूल को उठाया वो त्रिसूल वहां से हैट गया। कालिया को समझने में देर नेही लगी के ये त्रिसूल चमत्कारी हे। उसने मन ही मन उसकी कीमत अरबो से बढ़ा कर खरबो तक ले गया। इस बात से अनजान के उसने क्या गलती कर डाली हे, वो अपने घर आया तो देखा के उसके घर में उसकी दो भाई और उसके बीवी की लाश पड़ी हे। वो अब फिरसे केहर ढाने आगयी थी। कालिया के पेरो को निचे से जमीन खिसक गयी। वो भागता भागता  मुखिआ जी के हवेली में पहंचा। hindi stories

कालिया का ये हाल देख के  मुखिआ जी को ये जानने में देर नहीं हुई के जिसका दर था वही हगया हे। मुखिआ जी ने पूरी घटना कालिया के सामने उजागर किआ। बहोत साल पहले इस गाऊँ में एक सुन्दर लड़की हुआ करती थी। जिसके ऊपर मुखिआ जी के दादा जी का दिल आगया था। पर वो लड़की किसी औरसे प्यार करती थी। जब ये बात मुखिआ जी के दादा जी को पता चला तो उन्होंने उस लड़की और उसके प्रेमी को जिन्दा जमीं पे गाड़ दिया। पर मरते मरते वो लड़की ने श्राप दिया के वो बदला लेने जरूर वापस आएगी। दादा जी को उस् वक़्त इस बात का कतई इल्म नहीं था के मरते वक़्त जो बात वो लड़की बोली वो एक दिन सच हो जायेगा। दादा जी ने फिर सादी करली। पिताजी के जनम के डी महीने बाद ही एक  तरीके से दादी जी की मौत होगयी। फिर एक एक कर के घर के सदस्यों की मौत होने लगी। दादा जी क समझ में नहीं आरहाथा की ये सब क्या हो राहा हे। तभी एक तांत्रिक को बुलाया गया। जिसने ये काहा के इस हबेली पे किसी ताकत बर प्रेत का साया हे। और अब उसकी नजर मेरे पिता जी पर हे। जब तक वो उन्हें मर न देती वो नहीं जाएगी। इसके चलते दादा जी ने काई सारे हवन और पूजा करवाए  पर इसका कोई असर नहीं हुआ कुछ ही दिन में सारे परिबार वाले मरे गए सिर्फ दादा जी और पिताजी ही जिन्दा थे। तब मेरे दादा जी ने माहा काल यज्ञं करवाने को सोचा। पर इस यज्ञं में जान का भी खतरा था। पर दादा जी ने ये यज्ञं करवाने की थान लि थी। सारी तैयारियां हो गयी थी, तभी अचानक वो प्रेत आत्मा वहां  पहंच गयी। दादा जी उसे देख कर बिलकुल ही चौंक उठे। क्यों के ये वही लड़की थी जिससे दादा जी ने ही मरवाया था। माहा काल यज्ञं के अनुसार यज्ञं करता को यज्ञं पूरा होने तक अखंड जाप करते रहना होता हे। बिच में रुकने पे या बिच मेसे उठ के जाने से ये यज्ञं बिफल हो जाता हे। उस प्रेत आत्मा ने छलावा रचते हुए पिता जी के आवाज में मदत के लिए चीला ने लगी। पंडित जी के लाख रोकने पर भी दादा जी ने यज्ञं को आधे में ही छोड़ के उसे मारने चले गए। पर अफ़सोस दादा जी उससे मार न सके। दादा जी का कटा हुआ सर उसी यज्ञं कुंड में आके गिरा। दादा जी के  मरने के बाद सिर्फ मेरे पिता जी ही इस खानदान के आखरी वारिस बचे थे। उस प्रेत आत्मा ने कसम खाई थी के वो हमारे ख़ानदान में किसीको नहीं छोड़ेगी। इसीलिए जब वो पिताजी को मारने आयी तो पंडित जीने उसपे माहा काल का पबित्र जल छिड़क के उसे बस में कर लिया। पर उस प्रेत आत्मा को मार पाना उनके बस में नहीं था। इसीलिए समाये रहते उन्होंने पिताजी को वहां से लेके निकल लेना ही सही समझा। वो सीधा माहा काल के मंदिर पहंचे। और वहां एक कबच का निर्माण किया। पबित्र आत्माओ के सक्ति से अभिमंत्रित कबच को पिताजी को पहनाया। और उस वक़्त के सबसे माहान तांत्रिक स्वामी त्रिलोकानद के आसीर्बाद से एक माहा काल सस्त्र का निर्माण किया। और जहाँ पर वो लड़की को गाड़ा गया था बही पे माहा काल का त्रिसूल और कबच से हमेसा के लिए उस प्रेत आत्मा को कैद करदिया। जिससे कुछ ही पल पेहेले कालिया ने फिरसे आज़ाद करदिया था। hindi stories

क्या इस मुसीबत से मुखिया जी बच पाएंगे। आखिर क्या केहर ढायेगी वो प्रेत आत्मा जानने के लिए हमारे साथ बने रहिये।
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